🌞

आत्ममूल्यांकन और व्यावहारिकता

आत्ममूल्यांकन और व्यावहारिकता
केवल अपने बारे में ऊँचा सोचना पर्याप्त नहीं है। यह भी ज़रूरी है कि आप स्वयं को सही ढंग से समझें, अपनी कमियों और योग्यताओं को परखें। आपने जो शिक्षा, ज्ञान या विचार प्राप्त किए हैं, वे आपके कर्म में दिखाई देने चाहिए। यदि आपके विचार और ज्ञान किसी संस्था, समाज या कार्य-व्यवस्था में उपयोगी परिणाम नहीं दे रहे हैं, तो आपको स्वयं में सुधार की आवश्यकता है।
मनुष्य की पहचान उसके शब्दों या ज्ञान से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और समाज के लिए उसकी उपयोगिता से होती है।
संघ प्रशासक
श्रीचैतन्यराष्ट्र संघ
← सभी पोस्ट देखें