संज्ञान से व्यवस्था-सुधार की ओर

संज्ञान से व्यवस्था-सुधार की ओर
समाज में उठने वाले प्रश्न यदि केवल विरोध का कारण न बनकर चिंतन और संवाद का आधार बनें, तो वे व्यवस्था को बेहतर बनाने की शक्ति बन सकते हैं। वास्तविक विकास वही है, जो मनुष्य की चेतना, विवेक और समझ के हर स्तर को जागृत करे।
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