करुणा, हुनर और तार्किक सोच

करुणा, हुनर और तार्किक सोच
व्यापक और सकारात्मक सुधार को भविष्य पर नहीं टालना चाहिए। यदि समाज, व्यवस्था या स्वयं के जीवन में कोई बदलाव आवश्यक है, तो उसकी शुरुआत आज से ही करनी चाहिए, क्योंकि कल की प्रतीक्षा करते-करते बहुत देर हो सकती है।
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